गोरखपुर में बच्चों की मौत पर जांच रिपोर्ट, ऑक्सीजन की नहीं थी कमी, सप्लाई रोकने से बिगड़े हालात

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले में यूपी के मुख्य सचिव ने अपनी रिपोर्ट दे दी है. इस रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले दावे किए गए हैं. रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, लेकिन आजतक को सूत्रों के हवाले से इसके प्रमुख बिंदुओं का पता चला है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बच्चों की मौत ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई है.

सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली की रिपोर्ट में कहा गया है कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में लिक्विड ऑक्सीजन रोका गया था, लेकिन ऑक्सीजन की कमी से नहीं हुई बच्चों की मौत. ऑक्सीजन रोके जाने के बाद भी वैकल्प‍िक सिलिंडर से निर्बाध गैस की आपूर्ति हो रही थी.

इंसेफेलाइटिस से मरे बच्चे

रिपोर्ट में तो यह तक गया है कि इन महीनों में हर साल इंसेफेलाइटिस से बच्चों की मौत होती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने ढाई करोड़ रुपये सरकार को साल में वापस कर दिए, लेकिन उसने महज 65 लाख रुपये गैस सप्लाई करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स को भुगतान नहीं किया.

प्रिंसिपल और सप्लायर्स के बीच सांठगांठ

रिपोर्ट में कहा गया है कि मेडिकल कॉलेज के निलंबित प्रिंसिपल राजीव मिश्रा और दो भुगतान क्लर्क की सप्लायर्स कंपनी के साथ सांठगांठ थी और रिश्वत के लिए साजिश की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता. रिपोर्ट में प्रिंसिपल राजीव मिश्रा की पत्नी पूर्णिमा शुक्ला के भी सप्लायर कंपनी के साथ साठगांठ का जिक्र है.

दर्ज हुआ एफआईआर

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश पर प्रदेश सरकार ने गोरखपुर में बाबा राघवदास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज में बच्चों की मौत के मामले में बुधवार देर रात लखनऊ के हजरतगंज थाने में मामला दर्ज करा दिया हैं. इन लोगों के खिलाफ IPC की धारा 420, 308, 120 B, भ्रष्टाचार निवारण अधीनियम, इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट की धारा 15 समेत छह धाराओं में दर्ज किया गया है.

सरकार की ओर से बुधवार को जारी बयान के मुताबिक, इस मामले में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की आपूर्ति करने वाली कंपनी पुष्पा सेल्स के संचालकों, प्रिसिंपल  डॅा राजीव मिश्र व उनकी पत्नी समेत सात कर्मचारियों एवं डाक्टरों को नामजद किया गया हैं.